आखिर क्यों शक्तिशाली अंग्रेज और मुगल भी इस किले की दीवारों को नहीं भेद पाए? जाने क्या है रहस्य

 लोहागढ़ किला भरतपुर भारत का वो किला जिसे अंग्रेज भी नहीं जीत पाए

राजस्थान के इतिहास में कई किले हैं, लेकिन लोहागढ़ किले की दास्तान सबसे अलग है। भरतपुर में स्थिति ये किला अपनी मज़बूती और अनोखी बनावत के लिए जाना जाता है। इसका नाम 'लोहागढ़' इसलिए रखा गया क्योंकि इसमें कोई भी शत्रु कभी जीत नहीं पाया था यहां तक ​​कि ब्रिटिश सेना भी चार महीने की घेराबंदी के बाद हार मान गई थी।

"लोहागढ़ किला भरतपुर"
"लोहागढ़ किला भरतपुर"

लोहागढ़ किला कहां है?

लोहागढ़ किला राजस्थान के भरतपुर शहर के बिल्कुल बीच में स्थित है। ये दिल्ली से 200 किमी और जयपुर से 185 किमी की दूरी पर है। ये किला 'गोल्डन ट्राइएंगल' (दिल्ली-आगरा-जयपुर) के बेहद करीब है, इसलिए यहां पहुंचना बहुत आसान है।

अजेय लोहागढ़ का गौरवशाली इतिहास

लोहागढ़ किले का निर्माण 1733 ईस्वी में जाट शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था। उस समय के युद्धों में तोपों का महत्व बढ़ गया था, इसलिए महाराजा ने इसे एक ऐसी तकनीक से बनवाया जो तोप के गोलों को भी बेअसर कर दे। 1805 में लॉर्ड लेक के नेतृत्व में अंग्रेज सेना ने 4 महीने तक इस किले की घेराबंदी की और दर्जनों बार हमला किया, लेकिन वे किले की दीवारों को पार नहीं कर पाए और अंत में उन्हें पीछे हटना पड़ा।

"राजा सुरजमल"

किले की अनोखी सुरक्षा प्रणाली (Architecture)

इस किले की सबसे बड़ी खासियत इसकी मिट्टी की दीवारें हैं। पत्थर की मुख्य दीवार के बाहर मिट्टी की एक बहुत मोटी और ऊंची दीवार बनाई गई थी।

मिट्टी का जादू- जब दुश्मन तोप से गोला दागता था, तो वह मिट्टी की नरम दीवार में धंस जाता था और उसका असर खत्म हो जाता था।

सुरक्षा खाई- किले के चारों ओर एक 150 फीट चौड़ी और 50 फीट गहरी खाई है, जिसमें मोती झील का पानी भरा रहता था। पुराने समय में इसमें मगरमच्छ छोड़े जाते थे ताकि कोई तैरकर अंदर न आ सके।

भरतपुर कैसे पहुँचें? (How to Reach)

लोहागढ़ किला भरतपुर शहर के बीचों-बीच स्थित है, जो दिल्ली और जयपुर के पास है।

हवाई मार्ग से (हवाई जहाज)- सबसे ज्यादा आगरा हवाई अड्डा (55 किमी) है, लेकिन बेहतर कनेक्टिविटी के लिए आप दिल्ली या जयपुर हवाई अड्डे का इंतजार कर सकते हैं। वहां से टैक्सी या बस आसान से मिल जाती है।

ट्रेन (रेल) द्वारा- भरतपुर जंक्शन एक बड़ा रेलवे स्टेशन है जो मुंबई, दिल्ली और जयपुर जैसे शहरों से सीधा जुड़ा है। स्टेशन से किला सिर्फ 3-4 किमी की दूरी पर है।

सड़क मार्ग से (सड़क)-राष्ट्रीय राजमार्ग 21 (जयपुर-आगरा राजमार्ग) पर होने के कारण यहां बस या अपनी कार से आना बहुत सुविधाजनक है।

किले के अंदर देखने योग्य स्थान (Major Attractions)

लोहागढ़ किला सिर्फ एक किला नहीं, बल्कि इतिहास और वास्तुकला (वास्तुकला) का एक खजाना है। अगर आप यहां जा रहे हैं, तो ये टॉप 5 जगह देखना बिल्कुल मत भूलना।

लोहागढ़ राजकीय संग्रहालय (कचहरी कलां)

किले के बिल्कुल बीच में स्थित ये संग्रहालय पहले भरतपुर रियासत की 'कचहरी' (कोर्ट) हुआ करती थी।

खास क्या है- यहां दूसरी सदी की पुरानी मूर्तियां, राजाओं के असली हथियार (तलवारें, ढाल), और पुराने जमाने के शाही बर्तन राखे गए हैं।

क्यों देखें- भरतपुर के जाट राजाओं की शान-ओ-शौकत को समझने के लिए ये सबसे अच्छी जगह है।

जवाहर बुर्ज और फतेह बुर्ज

ये किले के दो सबसे ऊंचे और मजबूत टावर हैं।

खास क्या है जवाहर बुर्ज- को महाराजा जवाहर सिंह ने दिल्ली पर अपनी विजय की याद दिलाई थी। यहां आज भी राजाओं का राज-तिलक (राज्याभिषेक) होता था।

क्यों देखें- यहां से पूरे भरतपुर शहर का 360 डिग्री व्यू दिखता है और दीवारों की मोटाई का अंदाजा लगाया जा सकता है।

किशोरी महल और कोठी खास

ये किले के अंदर के सबसे खूबसूरत महल हैं।

खास क्या है-महाराजा सूरजमल की रानी, ​​​​रानी किशोरी के लिए बना ये महल अपनी नक्काशी (नक्काशी) के लिए मशहूर है। इसके पास ही 'कोठी खास' है जो कभी शाही निवास हुआ करता था।

क्यों देखें- राजस्थानी और मुगल वास्तुकला का एक अनोखा मिश्र यहां देखने को मिलता है।

 अष्टधातु दरवाजा (8 dhatuon ka darwaza)

किले का मुख्य प्रवेश द्वार (मुख्य द्वार)।

खास क्या है- ये दरवाजा 8 अलग-अलग धातुओं से बना है। इतिहास के मुताबिक, इसे महाराजा जवाहर सिंह 1764 में दिल्ली के लाल किले से उखाड़ कर लाए थे (जो असलियत में चित्तौड़गढ़ से दिल्ली गया था)।

क्यों देखें- इस दरवाजे की मज़बूती और इसके पीछे की जीत की कहानी इसे बेहद खास बनाती है।

किले के चारों तरफ की खाई

लोहागढ़ की सबसे बड़ी सुरक्षा इसकी खाई थी।

खास क्या है- ये 150 फीट चौड़ी और लगभाग 50 फीट गहरी खाई है जो हमेशा पानी से भरी रहती थी। इसमें 'मोती झील' से पानी आता था।

क्यों देखें- ये देख कर आप दंग रह जाएंगे कि कैसे पुराने जमाने में बिना किसी आधुनिक तकनीक के इतनी बड़ी 'वाटर डिफेंस सिस्टम' बन गई थी।

घूमने का सही समय

भरतपुर घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे अच्छा है। इस दौरान मौसम सुहाना रहता है और आप पास ही स्थित केवलादेव पक्षी विहार (Bird Sanctuary) का भी आनंद ले सकते हैं।

लोहागढ़ किले के पास शीर्ष होटल (रहने के विकल्प)

अगर आप राजसी ठाट-बाट (लक्जरी) या बजट स्टे ढूंढ रहे हैं, तो ये बेस्ट हैं।

बाग (लक्जरी/विरासत)- ये एक बहुत ही खूबसूरत हेरिटेज होटल है जो पुराने बगीचे के बीच बना है। अगर आप सुकून और प्रकृति चाहते हैं, तो ये सबसे अच्छा है।

लक्ष्मी विलास पैलेस (विरासत)- ये एक असली महल है जिसके होटल में बदला गया है। ये किला और पक्षी अभयारण्य दोनो के पास है। यहां का आर्किटेक्चर आपको पुराने जमाने की याद दिलाएगा।

होटल उदय विलास पैलेस (मिड-रेंज)- अगर आपका बजट मीडियम है, तो ये एक अच्छा विकल्प है। यहां स्विमिंग पूल और साफ-सुथरे कमरे मिल जाएंगे।

होटल सनबर्ड (बजट)- ये बर्ड सैंक्चुअरी के बिल्कुल गेट पर है और किले से भी ज्यादा दूर नहीं है। बैकपैकर और बजट यात्रियों के लिए ये सबसे अच्छा है।

भरतपुर में खाने की जगह (रेस्तरां और भोजन)

भरतपुर का खाना अपने स्वाद के लिए जाना जाता है। जगहो पर जरूर जाये।

"भरतपुर की प्रसिद्ध कचोरी"
"भरतपुर की प्रसिद्ध कचोरी"

श्री राधे नमकीन- अगर आपको भरतपुर की मशहूर 'कचौरी' और 'समोसा' ट्राई करना है, तो ये जगह स्थानीय लोगों की पहली पसंद है।

गोकुल मिष्ठान भंडार- यहां की राजस्थानी मिठाइयां और नाश्ता शुद्ध शहर में प्रसिद्ध है।

आंगन (बाग के अंदर)- अगर आप एक अच्छी डिनर डेट पर हैं या परिवार के साथ शांत माहौल में खाना चाहते हैं, तो यहां का इंडियन और कॉन्टिनेंटल खाना ट्राई करें।

इबिस रेस्तरां- ये पक्षी अभयारण्य के पास है और यहां का 'थाली' सिस्टम काफी लोकप्रिय और सस्ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रसन1. लोहागढ़ किले को 'अजेय' क्यों कहा जाता है?

उतर- इसे अजेय इसलिए कहा जाता है क्योंकि अपने पूरे इतिहास में इसे कभी भी युद्ध के जरिए पूरी तरह जीता नहीं जा सका। यहाँ तक कि शक्तिशाली ब्रिटिश सेना भी जनरल लॉर्ड लेक के नेतृत्व में कई महीनों की कोशिश के बाद इसे जीतने में नाकाम रही थी।

प्रसन2. इस किले का निर्माण किसने और कब करवाया था?

उतर- लोहागढ़ किले का निर्माण महाराजा सूरजमल ने 1733 ईस्वी में करवाया था। वे भरतपुर रियासत के सबसे प्रतापी जाट राजा माने जाते हैं।

प्रसन3. क्या यह किला वास्तव में लोहे का बना है?

उतर- नहीं, इसका नाम 'लोहागढ़' इसकी मजबूती के कारण पड़ा है। यह किला मिट्टी की विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। जब तोप के गोले इन दीवारों पर गिरते थे, तो वे मिट्टी में धंस जाते थे और उनका विस्फोट बेअसर हो जाता था।

प्रसन4. किले के चारों ओर जो नहर है उसका नाम क्या है?

उतर- किले की सुरक्षा के लिए इसके चारों ओर एक गहरी खाई (मोती झील से जुड़ी) बनाई गई है जिसे 'सुजान गंगा नहर' कहा जाता है। पुराने समय में इसमें मगरमच्छ छोड़े जाते थे ताकि दुश्मन तैरकर अंदर न आ सके।

प्रसन5. किले के 'अष्टधातु दरवाजे' का क्या इतिहास है?

उतर- यह दरवाजा महाराजा जवाहर सिंह 1765 में दिल्ली के लाल किले से जीतकर लाए थे। माना जाता है कि मूल रूप से यह दरवाजा चित्तौड़गढ़ किले का था, जिसे अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली ले गया था।

प्रसन6. किले के अंदर कौन-कौन से मुख्य बुर्ज हैं? किले में दो प्रमुख बुर्ज हैं,

उतर-जवाहर बुर्ज- दिल्ली पर जीत की याद में बनाया गया।

फतेह बुर्ज- अंग्रेजों पर मिली जीत (1805) के उपलक्ष्य में बनाया गया।

प्रसन7. लोहागढ़ किला कहाँ स्थित है और यहाँ कैसे पहुँचें?

उतर- यह राजस्थान के भरतपुर शहर के केंद्र में स्थित है।रेल मार्ग भरतपुर रेलवे स्टेशन प्रमुख शहरों (दिल्ली, जयपुर, आगरा) से जुड़ा है।सड़क मार्ग आगरा से यह मात्र 55 किमी और जयपुर से लगभग 185 किमी दूर है।

प्रसन8. क्या किले में प्रवेश के लिए कोई शुल्क है?

उतर- किले के परिसर में प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन इसके अंदर स्थित राजकीय संग्रहालय (Government Museum) को देखने के लिए एक छोटा सा टिकट शुल्क देना होता है।

निष्कर्ष- इतिहास और साहस का संगम

लोहागढ़ किला केवल मिट्टी और पत्थरों का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारतीय अजेयता और अदम्य साहस का जीता-जागता प्रमाण है। एक ऐसे समय में जब शक्तिशाली तोपें बड़े-बड़े किलों को जमींदोज कर रही थीं, महाराजा सूरजमल की दूरदर्शिता और मिट्टी की इन दीवारों ने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति (अंग्रेजों) के घमंड को चूर-चूर कर दिया।

यदि आप इतिहास प्रेमी हैं या राजस्थान की वास्तविक वीरता को करीब से देखना चाहते हैं, तो भरतपुर का लोहागढ़ किला आपकी यात्रा सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। यहाँ की हर दीवार, हर बुर्ज और सुजान गंगा की लहरें आज भी जाट योद्धाओं के शौर्य की गाथा सुनाती हैं।

"क्या आप कभी लोहागढ़ किले की इन विशाल दीवारों को देखने भरतपुर गए हैं? या राजस्थान का कौन सा किला आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करता है? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में हमारे साथ ज़रूर साझा करें!"

 

"जानिए लोहागढ़ किला (भरतपुर) का गौरवशाली इतिहास, जिसे भारत का 'अजेय दुर्ग' कहा जाता है। आखिर क्यों शक्तिशाली अंग्रेज और मुगल भी इसकी मिट्टी की दीवारों को नहीं भेद पाए? महाराजा सूरजमल की वीरता और किले की अनूठी वास्तुकला की पूरी जानकारी।

 Braj Holi 2026- ब्रज की होली का संपूर्ण गाइड, इतिहास और मुख्य कार्यक्रम

खेजड़ली गाँव और बिश्नोई विलेज, जोधपुर टूरिज्म की पूरी जानकारी जाने यहाँ

Next Post Previous Post
No Comment
Add Comment
comment url