बगरू और सांगानेर हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग- जयपुर की आर्टिसन ट्रेल पर कैसे जाएँ और क्या देखें?
राजस्थान 'आर्टिसन ट्रेल्स' 2026- बगरू और सांगानेर के शिल्पकारों के घर तक का सफर
जब
भी हम राजस्थान की बात करते हैं तो जहां पर सबसे पहला भव्य किला, मलेशिया महल और सुनहरी
रेत आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राजस्थान का असली रूह कहां बसती है? जी हाँ उत्तर है—वहां के
शिल्पकारों
के हाथों में
।
2026
में
टूरिज्म का नया ट्रेंड 'आर्टिसन ट्रेल्स' (कारीगर ट्रेल्स) है, जहां टूर सिर्फ
अनौपचारिक नहीं हैं,
बल्कि
उन्हें बनाई गई नजरें हैं और खुद भी हाथ मिलाते हैं।
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| "जयपुर बागरू मे"स्थानीय कारीगरों द्वारा हस्त ब्लॉक प्रिंटिंग प्रक्रिया 2026" |
सांगानेर- जहाँ कपड़े पर फूल खिलते हैं
जयपुर
से मात्र 12-15
किमी
दूर सांगानेर अपनी
'सांगानेरी प्रिंट' के लिए विश्व प्रसिद्ध
है।
कैसे पहुँचें-
जयपुर
एयरपोर्ट के पास होने के कारण आप यहाँ टैक्सी या सिटी बस से 20 मिनट में पहुँच सकते
हैं।
क्या देखें-
यहाँ
की प्रिंटिंग सफेद या हल्के बेस पर बारीक फूलों और बेल-बूटों के लिए जानी जाती है।
सांगानेर में नदी किनारे सुखाए जाते रंगीन कपड़े फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए
किसी जन्नत से कम नहीं हैं।
बगरू- प्रकृति और मिट्टी का संगम
जयपुर-अजमेर
हाईवे पर 30
किमी
दूर स्थित बगरू अपनी 'दाबू प्रिंट' (Dabu Print) के लिए मशहूर है।
कला की विशेषता-
यहाँ
प्रिंटिंग के लिए 'मिट्टी' (लेई) का लेप लगाया
जाता है ताकि उस हिस्से पर रंग न चढ़े। यहाँ के गहरे नीले (Indigo) और मैरून रंग पूरी तरह
प्राकृतिक स्रोतों से बनाए जाते हैं।
पहुँचने का तरीका-
जयपुर
से निजी टैक्सी या अजमेर जाने वाली बसों द्वारा यहाँ 1 घंटे में पहुँचा जा
सकता है।
बगरू और सांगानेर-थप्पों की गूंज और प्राकृतिक रंग (हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग)
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| "बगरू में लकड़ी के थप्पों से कपड़ों पर प्राकृतिक रंग" |
जयपुर
के पास स्थित
बगरू
अपनी
'छपाई' के लिए दुनिया भर में मशहूर
है। यहां की सारणी में आपको लकड़ी के थप्पों (ब्लॉक) के ठक-ठक की आवाजें सुनाई
देती हैं।
अनुभव-
यहां
आप 'छीपा' समुदाय के घर में
व्यापारी देख सकते हैं कि कैसे प्राकृतिक रंग (नील, अनार के छिलके और
हल्दी) से जादू का आकर्षण होता है।
आप
क्या कर सकते हैं- कई वर्कशॉप में इंटरनेट को अपना रुमाल या दुपट्टा प्रिंट
करने का मौका मिलता है।
'आर्टिसन ट्रेल' पर क्या करें? (गतिविधियाँ)
यहां
का सफर सिर्फ देखने के लिए नहीं, बल्कि एक्सपीरियंस (अनुभव)
करने
के लिए है।
छीपा समुदाय के घर
(स्टूडियो विजिट)- यहां की गैलरी में आपको छीपा समुदाय के लोग मिलेंगे। उनके
कारखाने या छोटे कारखाने (कारखाना) में आप लाइव ब्लॉक प्रिंटिंग देख सकते हैं।
वर्कशॉप में हिस्सा लें (DIY)- कई आर्टिस्टिक फिल्मों
को एक दिन की वर्कशॉप देते हैं। आप खुद की लकड़ी के 'ब्लॉक' फैब्रिक पर नील
(इंडिगो) या प्राकृतिक रंग से चपाई करना सीख सकते हैं।
सूखे का अद्भुत दृश्य-सांगानेर में नदी के
किनारे या खुले मैदानों में सैकड़ों मीटर लंबे रंगीन कपड़े सुखाते हुए दृश्य
फोटोग्राफी के लिए सबसे अच्छे हैं।
ब्लॉक ब्लॉक देखें-
चपाई
से पहले लकड़ी के ब्लॉक पर निर्माण किया जाता है। इन कलाकारों को देखना भी एक अलग
कला है।
यहां
के प्रसिद्ध व्यंजन (मस्ट ट्राई फूड)
सिर्फ कला ही नहीं, यहां का स्वाद भी आपको दीवाना बना देगा।
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| "राजस्थानी भोजन" |
सांगानेर
की 'मिश्री मावा' और 'लड्डू'- सांगानेर के पुराने
बाजार की मिठाइयाँ बहुत प्रसिद्ध हैं।
दाल-बाटी-चूरमा-
हाईवे
पर स्थित ढाबों पर मिलेगा असली राजस्थानी स्वाद।
बगरू
की 'कढ़ी-कचौरी'- सुबह के समय गरमा-गरम
कचौरी और कटी हुई कढ़ी यहां की सबसे लोकप्रिय नाश्ता है।
मिर्ची वड़ा- अगर आप तीखा खाने के शौकीन हैं तो यहां के मिर्ची वड़े जरूर खाएं।
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| "राजस्थानी भोजन कढ़ी कचौरी और मिर्ची वड़ा सांगानेर" |
यात्रियों के लिए प्रो-टिप्स
कब?- सबसे अच्छा समय
अक्टूबर
से मार्च
के
बीच है। गर्मियों में (अप्रैल-जून) यहाँ बहुत गर्मी होती है, और गर्मियों में कपड़े
धोने का काम धीमा हो जाता है।
क्या बदलाव?- आरामदायक सूती कपड़े
और वॉकर के लिए अच्छे जूते,
क्योंकि
आप तंग परिधान में पैदल यात्रा कर सकते हैं।
दुकान-
यहां
से आप सीधे कारीगरों से बेड साइज, डुप्लिकेट और सूट पीस खरीद सकते हैं। यह
शोरूम की तुलना में 30-40% सस्ता और असली (हस्तनिर्मित)
होता है।
शॉपिंग- सीधे हाथों से, सीधे घर तक
इन
गाँवों से शॉपिंग करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको 100% असली हैंड-ब्लॉक प्रिंट
मिलता
है। बिचौलियों के न होने से यहाँ बेडशीट, सूट और दुपट्टे शोरूम
की तुलना में काफी किफायती दामों में मिल जाते हैं।
यह पर्यावरण के लिए क्यों बेहतर है?
पानी का बचाव-
इन
रंगों को धोने के बाद निकलने वाला पानी खेतों के लिए हानिकारक नहीं होता, बल्कि खाद का काम करता
है।
त्वचा के लिए सुरक्षित-
चूँकि
इनमें कोई सिंथेटिक डाई नहीं होती, इसलिए ये कपड़े पहनने
पर त्वचा में जलन या एलर्जी नहीं करते।
जीरो वेस्ट (Zero Waste)- रंगों के बचे हुए
अवशेष (जैसे अनार के छिलके) को सुखाकर खाद बना लिया जाता है।
यहाँ
आसपास के मुख्य दर्शनीय स्थल
कागज़ी मोहल्ला, सांगानेर (Handmade Paper
Industry)
सांगानेर
सिर्फ कपड़ों के लिए नहीं,
बल्कि
हाथ
से बने कागज़
के
लिए भी मशहूर है।
क्या
देखें-
यहाँ
पुराने फटे कपड़ों और होज़री के वेस्ट से रंगीन और डिज़ाइनर पेपर बनाए जाते हैं।
खासियत-
आप
यहाँ कागज़ बनने की पूरी प्रक्रिया देख सकते हैं और सुंदर डायरियाँ या फोटो फ्रेम भी खरीद सकते हैं।
संघी
जी जैन मंदिर,
सांगानेर
(Ancient
Jain Temple)
यह
10वीं शताब्दी का एक
अत्यंत सुंदर और प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर है।
क्या
देखें-
लाल
पत्थर की बारीक नक्काशी और इसके सात मंजिला ऊंचे शिखर। यह मंदिर वास्तुकला (Architecture) के शौकीनों के लिए
जन्नत है।
चोखी ढाणी (Chokhi Dhani)
सांगानेर
से मात्र 10-15
मिनट
की दूरी पर स्थित यह एक 'विलेज रिसॉर्ट' है।
क्या
करें-
अगर
आप शाम को फ्री हैं,
तो
यहाँ राजस्थानी संस्कृति,
ऊंट
की सवारी,
कठपुतली
शो और पारंपरिक 'मानुहार' के साथ भोजन का आनंद
ले सकते हैं।
मुहाना मंडी (Asia's Largest
Terminal Market)
सांगानेर
के बहुत पास स्थित यह एशिया की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडियों में से एक है।
क्यों जाएँ- अगर आप 'Street Photography' या स्थानीय जीवन को
करीब से देखना चाहते हैं,
तो
सुबह-सुबह यहाँ की चहल-पहल देखने लायक होती है।
फोटोग्राफी प्रो-टिप्स
कलर्स-
चूँकि
बैकग्राउंड बहुत रंगीन होगा, इसलिए आप सफेद या हल्के रंग के कपड़े
(जैसे व्हाइट चिकनकारी कुर्ता) पहनें, ताकि फोटो में आप अलग
से उभरकर आएँ।
एंगल- 'लो-एंगल' (Low Angle) शॉट लें जब कपड़े ऊपर
सूख रहे हों,
इससे
फोटो में भव्यता आती है।
अनुमति-
किसी
भी कारीगर की फोटो लेने से पहले मुस्कुराकर उनसे पूछ लें, वे बहुत मिलनसार होते
हैं और अक्सर आपको पोज़ देने में मदद भी करते हैं!
v सांगानेर का 'कलरफुल स्काई' (The Fabric Waves)
लोकेशन-
सांगानेर
में द्रव्यवती नदी के किनारे के खुले मैदान।
क्या
क्लिक करें-
यहाँ
सैकड़ों मीटर लंबे रंगीन कपड़े बांस की बल्लियों पर सुखाए जाते हैं। जब हवा चलती
है,
तो
ये कपड़े लहरों की तरह दिखते हैं।
बेस्ट
टाइम-
सुबह
10:00
से
दोपहर 12:00
बजे
(जब धूप चटख होती है और रंग खिलकर आते हैं)।
v बगरू के 'ब्लू गेट्स' और पुरानी गलियाँ (Rustic Vibes)
लोकेशन-
छीपा
मोहल्ला,
बगरू।
क्या
क्लिक करें-
यहाँ
के पुराने घरों के लकड़ी के नक्काशीदार दरवाज़े और दीवारों पर प्राकृतिक रंगों के
छींटे एक विंटेज लुक देते हैं। एक कारीगर को हाथ से छपाई करते हुए 'कैंडिड शॉट' (Candid Shot) ज़रूर लें।
v 'इंडिगो वैट' (The Indigo Magic)
लोकेशन-
बगरू
के डाईंग यूनिट्स।
क्या
क्लिक करें-
गहरे
नीले रंग (Indigo)
से
भरे हुए मिट्टी के बड़े-बड़े कुंड। जब कारीगर सफेद कपड़े को नीले रंग में डुबोकर
बाहर निकालता है,
तो
वह पल कैमरे में कैद करने लायक होता है
v ब्लॉक वॉल (The Pattern Wall)
लोकेशन-
किसी
भी प्रिंटिंग वर्कशॉप के अंदर।
क्या
क्लिक करें-
दीवारों
पर सजे हुए हजारों लकड़ी के ब्लॉक्स (Blocks)। इन ब्लॉक्स का 'सिमेट्री शॉट' (Symmetry Shot) आपके इंस्टाग्राम
ग्रिड को बहुत प्रोफेशनल लुक देगा।
“जब
आप बगरु में “इंडिगो वैट” को करीब से देखने हैं,तो आपको मिट्टि और कुदरत की एक
सोंधी महक आती है,जो किसी भी महगें परफ्यूम से बेहतर और अलग हैं।’’
निष्कर्ष
'आर्टिसन ट्रेल्स' सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की 'लोकल फॉर वोकल' मुहिम का हिस्सा है।
अगली बार जब आप जयपुर आएँ,
तो
इन गलियों की खाक ज़रूर छानें, क्योंकि असली राजस्थान इन्हीं ठप्पों की
गूँज में बसता है।
अक्सर
पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न1- बगरू और सांगानेर
प्रिंटिंग में क्या अंतर है?
उत्तर-
मुख्य
अंतर रंगों और डिजाइन का है। बगरू प्रिंटिंग
में
आमतौर पर गहरे रंगों (जैसे काला, लाल, मटियाला) और प्राकृतिक
मिट्टी (Dabu)
का
उपयोग होता है। जबकि सांगानेर प्रिंटिंग
अपने
सफेद बेस,
बारीक
फूलों की नक्काशी और चटख रंगों के लिए जानी जाती है।
प्रश्न2- क्या पर्यटक खुद ब्लॉक
प्रिंटिंग की कोशिश कर सकते हैं?
उत्तर-
हाँ, बिल्कुल! बगरू और
सांगानेर में कई ऐसी 'आर्टिसन वर्कशॉप्स' और स्टूडियो हैं जो
पर्यटकों के लिए 2
घंटे
से लेकर पूरे दिन का कोर्स चलाती हैं। यहाँ आप खुद अपना रुमाल या स्कार्फ प्रिंट
कर सकते हैं।
प्रश्न3- जयपुर से बगरू और
सांगानेर पहुँचने का सबसे आसान तरीका क्या है?
उत्तर-
सांगानेर
जयपुर
शहर के बहुत करीब (10-12
किमी)
है,
जहाँ
आप ऑटो या सिटी बस से पहुँच सकते हैं। बगरू
लगभग
30
किमी
दूर है,
जिसके
लिए आप टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या अजमेर रोड जाने वाली बस का उपयोग कर सकते
हैं।
प्रश्न4- क्या यहाँ से कपड़े
खरीदना सस्ता पड़ता है?
उत्तर-
जी
हाँ,
शोरूम
या बड़े मॉल्स की तुलना में अगर आप सीधे इन गाँवों के कारीगरों से कपड़े खरीदते
हैं,
तो
आपको 40%
से
50%
तक
की बचत
हो
सकती है और आपको शुद्ध हस्तशिल्प (Handmade) उत्पाद मिलते हैं।
प्रश्न5- आर्टिसन ट्रेल पर जाने
के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर-
सबसे
अच्छा समय
अक्टूबर
से मार्च
के
बीच का है। मानसून (जुलाई-सितंबर) के दौरान छपाई और सुखाने का काम अक्सर बंद रहता
है,
इसलिए
सर्दियों का मौसम घूमने और कला देखने के लिए सबसे उपयुक्त है।
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